नमस्कार,
आज क्रिप्टो मार्केट को लेकर डर, अफ़वाह और अनिश्चितता अपने चरम पर है। सोशल मीडिया से लेकर निवेशकों के व्हाट्सऐप ग्रुप तक एक ही सवाल घूम रहा है—क्या बिटकॉइन अब खत्म होने वाला है? क्या डिजिटल करेंसी के नाम पर हाथ में सिर्फ शून्य बचेगा?
बीते एक महीने में बिटकॉइन करीब 18% गिर चुका है, और अपने ऑल-टाइम हाई $126,198 से अब तक लगभग 40% टूट चुका है। बाजार विश्लेषकों की मानें तो अगर हालात नहीं बदले, तो 70% तक की और गिरावट भी देखने को मिल सकती है। ऐसे में डर का माहौल बनना लाज़मी है, लेकिन सवाल यह है—क्या यह वाकई क्रिप्टो का अंत है या सिर्फ एक कठिन दौर?
क्या यह सिर्फ टेक्निकल गिरावट है?
या सिस्टम के अंदर कुछ बड़ा टूट रहा है?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बिटकॉइन में मौजूदा गिरावट किसी एक चार्ट पैटर्न या टेक्निकल फेलियर की वजह से नहीं है। यह गिरावट लिक्विडिटी की कमी का सीधा नतीजा मानी जा रही है।
सीधी भाषा में समझें तो—
पिछले साल बिटकॉइन में जो तेज़ी आई थी, वह नए पैसे (New Money) के दम पर आई थी। जैसे-जैसे बाजार में नई पूंजी आती गई, कीमतें ऊपर जाती रहीं। लेकिन अब समस्या यह है कि नया पैसा आना लगभग रुक गया है।
जब:
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बिकवाली का दबाव बना रहे
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और बाजार में नई पूंजी न आए
तो कीमतों का गिरना लगभग तय माना जाता है।
बिटकॉइन ने अभी तक बॉटम कंफर्म नहीं किया
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि बिटकॉइन ने अभी अपना बॉटम तय नहीं किया है।
मतलब यह कि:
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यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि गिरावट रुक चुकी है
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बाजार में अभी भी बेचने वालों का दबाव बना हुआ है
हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि ज़रूरी नहीं कि एक दिन में बड़ा क्रैश आए। इसके बजाय बिटकॉइन एक लंबे समय तक साइडवेज मार्केट में भी फंसा रह सकता है—जहां न तेज़ी होगी, न बड़ी रिकवरी।
70% गिरावट का डर क्यों?
इतिहास पर नज़र डालें तो बिटकॉइन पहले भी कई बार 70% से ज्यादा टूट चुका है।
सबसे ताज़ा उदाहरण 2021–22 का है, जब:
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कीमतें लगभग $69,000 से
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गिरकर $15,500 के आसपास पहुंच गई थीं
विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस बार भी वही पैटर्न दोहराया गया, तो मौजूदा स्तर से 70% गिरावट होने पर बिटकॉइन की कीमत करीब $37,800 तक आ सकती है।
सबसे बड़ा खतरा कहां से?
इस पूरी तस्वीर में सबसे बड़ा जोखिम वहां से आ सकता है जहां बाजार को सबसे ज़्यादा सहारा मिला हुआ है—बड़े संस्थागत होल्डर्स।
अगर:
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बड़ी कंपनियां जो भारी मात्रा में बिटकॉइन होल्ड कर रही हैं
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अपनी रणनीति बदलकर खरीदार से विक्रेता बन जाती हैं
तो बाजार में गिरावट को संभालना बेहद मुश्किल हो सकता है। ऐसे हालात में बिकवाली की रफ्तार कई गुना तेज़ हो सकती है।
बाबा वेंगा की भविष्यवाणी और आज की सच्चाई
सोशल मीडिया पर इन दिनों बाबा वेंगा की 2026 को लेकर की गई भविष्यवाणी भी चर्चा में है, जिसमें कहा गया था कि बैंकिंग सिस्टम ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा।
आज जब:
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बिटकॉइन गिर रहा है
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लिक्विडिटी सूख रही है
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और जोखिम लेने की क्षमता कम हो रही है
तो लोग इन भविष्यवाणियों को मौजूदा हालात से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, यह साफ समझना ज़रूरी है कि बाजार भावनाओं से चलता है, भविष्यवाणियों से नहीं।
तो क्या बिटकॉइन वाकई जीरो हो जाएगा?
इस सवाल का सीधा जवाब है—नहीं, लेकिन जोखिम बहुत ऊंचा है।
हकीकत यह है कि:
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बिटकॉइन का अंत तुरंत नहीं दिखता
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लेकिन यह भी सच है कि आसान पैसा बनाने का दौर खत्म हो चुका है
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आने वाला समय उतार-चढ़ाव, डर और लंबी रिकवरी का हो सकता है
निवेशकों के लिए सबसे अहम सीख
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अफ़वाहों के आधार पर फैसले न लें
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गिरावट को देखकर घबराकर एंट्री या एग्ज़िट न करें
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केवल उतना ही पैसा लगाएं, जिसे खोने का जोखिम उठा सकें
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“जल्दी अमीर बनने” की सोच से दूर रहें
निष्कर्ष
बिटकॉइन इस वक्त कठिन दौर में है—यह सच है।
लेकिन इसे डिजिटल गोल्ड का अंत कहना अभी जल्दबाज़ी होगी। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यह गिरावट एक गहरी सफाई है या किसी नए चक्र की शुरुआत।